Wednesday, March 27, 2019



"क्या हम प्रोफेशनल है ?..."

प्रश्न को तीन कसौटियों पर कस कर देखतें है।

एक: क्या हम टी वी के उन पाँच चैनल्स के नाम जानते है जो हमें अपने सपनों के करीब लाते है?क्या आपको गली में बज रहे ढोल बाजों से दुःखी होने के बजाय उसमें संभावित जीत की थिरकन महसूस होती है? आपकी सुबह और शाम की ऊर्जा में ज्यादा अन्तर नहीं है? आपके कार्यस्थल से आपको बेहद लगाव है? 
उत्तर 'हाँ' है और दुनिया आपके काम की तारीफ करती है तो लगे रहो। आप कहीं भी बिना लड़े आधा युद्ध जीतने की काबिलियत रखतें हैं।

दो: आपके ग्राहक की मुलाजिमत करते वक्त आपके चेहरे की मुस्कान पल भर न गई और ग्राहक के सारे प्रश्न खत्म हो गए।  आप एक मुकम्मल प्रोफेशनल है। आपकी कर्मस्थली की आधी भौतिक सम्पदा आप का ज्ञान है।

तीन: आपके बोल में डमरू सा सम्मोहन है, आपका व्यवहार बसंत की शीतल बयार है, आप धैर्यवान है, लोग आपके साथ-साथ चलने को तैयार है क्योंकि आप छाते की तरह सबका आतप हर लेते है। आप दुनिया के किसी कोने में खड़े है, आधी जनसंख्या चुटकी बजाते ही आपके पाले में खड़ी हो जायेगी।

कसौटी पर कसना कभी।


शब्द शिल्प:

डॉ अर्जुन सिंह साँखला
प्राचार्य, लक्की इन्सटिट्यूट अॉफ प्रोफेशनल स्टडीज, जोधपुर।

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