"कुछ हीरे ऐसे भी..."
जीवन में किसी मुकाम पर आपकी ज़िंदगी में ऐसा पल अवश्य आया होगा, जब आप किंकर्तव्यविमूढ़ हो गए या आपको लगा अब आप हार जायेंगे।
ये वो पल है जहाँ हालात आप को 'तोड़' देंगे या कोई बड़ी उपलब्धि के लिए 'मोड़' देंगे।
बस इतना ध्यान रखना...
अपने ऊपर विश्वास बनाये रखो।अन्तिम विकल्प तक डटे रहो। सहानुभूति देने आने वालों से पूरी मुस्कान के साथ मिलो। उनको भनक दे दो कि आप तकलीफ में है ही नहीं। हिम्मत बंधाने वाला आये तो आपको देखकर थोड़ी हिम्मत वो आप से ले जाये। किसी आक्रोशित बैल की राह में खड़े मासूम बच्चे को आप जिस तत्परता से लपक कर बचा लेते है उसी तरीके से चलते समय में से एक पल को लपक लीजिए।
ये वो पल है जिसमें आप अपने में स्थापित हो चुके हो। कष्ट अब केवल अभ्यास के लिए हैं। कान अब खुद की आवाज ही सुनते हैं। जुबान के लिए विश्राम का समय है। फड़कती बाजुओं को धड़कती इच्छाओं से वाकिफ़ कराओ।
मन में घोषणा करो कि आज यहाँ कोई मील का पत्थर गड़ेगा या ये सड़क सूरज के सामने पिघल जाने वाले डामर के लिए कुख्यात होगी।
सारे 'हीरे' खदानों में ही नहीं होते हैं।
शब्द शिल्प: